हमीरपुर-सरीला: क्षेत्र-वासी भारी निराशा में हैं क्योंकि लाखों रूपए की लागत से बने ग्रामीण स्टेडियमों में आज स्थिति यह है कि ताले लटके हुए हैं और युवा खिलाड़ी सड़कों पर दौड़ने को मजबूर हैं। सरीला विकास खंड के ग्राम बोखर में मुख्य मार्ग पर बने इस स्टेडियम का हाल कुछ ऐसा है: द्वार पर कृषि यंत्र रख कर बच्चों का प्रवेश बंद कर दिया गया है, अंदर घास-झाड़ियां उग आई हैं, झूले टूटे-जर्जर अवस्था में हैं, कुर्सियाँ जंग के शिकार हो चुकी हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार खेल एवं विकास के लिए बनाई गई इन सुविधाओं को “शोपीस” बना दिया गया है। उन्होंने बताया कि खेलकूद के लिए तैयार इन भवनों-उपकरणों में अब कोचिंग नहीं है, उपकरण जंग खा रहे हैं, स्टेडियम का उपयोग नहीं हो रहा। उदाहरण के लिए, क्षेत्र के एक मिनी स्टेडियम का निर्माण लगभग 5 करोड़ रूपए में हुआ था पर अब ताले लगे हैं।
अभी जब इस संबंध में खंड विकास अधिकारी से बात की गई, तो उन्होंने “जल्द जांच की बात” कही है।
खेलकूद हेतु बनी ऐसी परिसंपत्तियों की उपेक्षा, ग्रामीण-युवाओं में मायूसी फैला रही है तथा खेल विभाग की मंशा विफल होती दिख रही है। अब प्रश्न उठ रहा है- जब बुनियादी संरचना मौजूद थी, तो इसे चल क्यों नहीं पाया? दोष किसका — निर्माण का, रख-रखाव का या विभागीय निगरानी का?
संवाददाता- गोविंदा सेन









