
जांजगीर, छत्तीसगढ़
जांजगीर-चांपा जिले में विभागीय व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। बिलासपुर जिले में 50 लाख रुपये की अनियमितताओं के आरोपों में निलंबित किए गए तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ अभिमन्यु साहू छह वर्षों से जांजगीर में ही पदस्थ हैं और बार-बार जारी स्थानांतरण आदेशों को प्रभावशाली संपर्कों के दम पर नज़रअंदाज़ करते आ रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक मस्तूरी जनपद पंचायत में ग्राम पंचायतों की राशि को अपने निजी खाते में डालकर गंभीर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप में अभिमन्यु साहू को निलंबित कर मंत्रालय अटैच किया गया था। इसके बावजूद उन्होंने न तो स्थानांतरण स्थल पर कार्यभार संभाला और न ही विभागीय आदेशों का पालन किया। वर्षों के भीतर उन्हें कई बार महासमुंद और गरियाबंद स्थानांतरित किया गया, लेकिन हर बार वे प्रभाव और कानूनी पैंतरे अपनाकर जांजगीर जिले में ही बने रहे। 2020 के स्थानांतरण के बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका लगाई, जहाँ अदालत ने नया स्थानांतरण आदेश जारी करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद विभाग ने अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
अधिकारी के लगातार एक ही पद पर जमे रहने से विभाग में असंतोष व्याप्त है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से एक स्थान पर टिके रहने से कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। अब देखने वाली बात यह है कि विभाग कार्रवाई करता है या स्थिति यथावत बनी रहती है।
रिपोर्टर – चंद्रशेखर बरेठ









